हरिद्वार, 2 जुलाई: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक से पहले हरिद्वार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को हर की पौड़ी समेत जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर मेगा आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अमले, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान का अभ्यास किया।


मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न आपदा परिदृश्यों को तैयार कर बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया गया। आपातकालीन सूचना मिलने से लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के संचालन तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।


जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर आयोजित इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता का आकलन करना है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसे संवेदनशील जनपद में मानसून के दौरान बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।


उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आने वाली कमियों को चिन्हित कर उनमें सुधार किया जाएगा, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता भी बेहद महत्वपूर्ण है।


प्रशासन का दावा है कि इस प्रकार के नियमित अभ्यासों से न केवल आपदा प्रबंधन तंत्र मजबूत होगा, बल्कि मानसून के दौरान जन-धन की हानि को भी न्यूनतम करने में मदद मिलेगी।







