देहरादून : देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनहित से जुड़े 19 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की जानकारी दी। इन निर्णयों को धामी सरकार की बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

कैबिनेट ने उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा नियमावली-2026 में संशोधन को मंजूरी देते हुए संस्कृत शिक्षा को नई दिशा देने का फैसला लिया। वहीं, प्रदेश के लिए गर्व की बात यह रही कि 98 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल गई।
सरकारी व्यवस्था में लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे उपनल कर्मचारियों को भी बड़ी राहत मिली है। समान कार्य-समान वेतन का लाभ अब 12 नवंबर 2018 से बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2024 तक कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने मुहर लगा दी, जिसे आंदोलनकारियों के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।

चारधाम यात्रा से जुड़े हजारों परिवारों को राहत देते हुए सरकार ने यात्रा मार्गों पर संचालित करीब 15 हजार घोड़ा-खच्चरों के बीमा प्रीमियम का 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार करीब 1 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च करेगी, जिससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा का कवच मिलेगा।
इसके अलावा बिटुमिन की बढ़ी हुई दरों को मंजूरी दी गई, कृषि विभाग के तहत एरोमेटिक प्लांट सेंटर को मजबूत करने के लिए पांच विशेषज्ञों की टीम गठित करने का फैसला लिया गया, कारागार विभाग के लिए नई नियमावली को हरी झंडी दी गई और पायलट परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
धामी कैबिनेट के ये 19 फैसले साफ संकेत देते हैं कि सरकार एक साथ शिक्षा, रोजगार, कर्मचारी हित, सामाजिक न्याय, कृषि, बुनियादी ढांचे और चारधाम यात्रा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है। अब नजर इस बात पर होगी कि इन फैसलों का लाभ जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से प्रदेश की जनता तक पहुंचता है।







